रविवार, 12 सितंबर 2010

प्रतिशोध

राजनीतिकारों पर और देश के गद्दारों
परसाठ साल किया हुआ शोध बाँट रहा हूँ।
गाँव के चौबारों में और दिल्ली के गलियारों में
आम आदमी का प्रतिशोध बाँट रहा हूँ ।
कुर्सी की आग में जलेंगे सारे एक दिन,
इसीलिये लोगों में विरोध बाँट रहा हूँ
जानता हूँ फ़र्ख न पड़ेगा कोई फिर भी,
हिजड़ों के गाँव में निरोध बाँट रहा हूँ॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. ये टुकड़े टुकड़े का विरोद जाया नहीं जायेगा...बुराइयों के प्रति विरोध से पहले जनमत भी जरुरी है...

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  2. ईश्वर दत्त4 जुलाई 2011 को 12:05 pm

    हिन्दू मुस्लिम और पिछढ़े वर्ग की राजनीति कर आज तक बाँट रहे हैं ये राजनेता समाज को, आम आदमी को गुमराह कर लूट रहे हैं चोटिल कर रहे हैं देश के रस्मों रिवाज को, हिन्दू को तो जोर जबरदस्ती कर निरोध थमा दिया, लेकिन हिस्सा देने के बाद भी रोक न पाये भारत को दो हिस्सों में बांटने वाले समाज को, उनका आज भी अपना बनाया कानून लागू है, धर्म के नाम पर....लेकिन हिन्दू बाध्य है अंग्रजों के बनाए गए सदियों पुराने संविधान पर .....काश मैं गोडसे की जगह होता तो उसे इतनी आसान मौत न देता।

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