बुधवार, 24 जुलाई 2013

जो अच्छे और सच्चे हैं उनके प्रति सद्भावनाएं, और जो फ्राड है उनकी घोर भर्त्सना के साथ

वही द्रोपद की बेटी है वही मीरा की तानें हैं,
वही राधा की पायल है, वहीं किस्से पुराने हैं।
कहां हो श्याम कलयुग में जरा आओ तो फिर देखो,
तुम्हारे नाम पर घर-घर खुली कितनी दुकानें हैं।।

तुम्ही हो एक सच्चे और जगत आधार हो फिर तुम,
गुरु किरपा यदि हो तो संमंदर पार हो फिर तुम।
गुरु जी रोज टीवी पर यही समझाते रहते हैं, 
करी न गांठ ढीली तो बड़े मक्कार हो फिर तुम।।

यहां दौलत से यारी है, वहां औरत भी प्यारी है,
नशे में भक्त हैं इनके, चढ़ी सिर पर खुमारी है।
नहीं समण कोई इतिहास इनका ढूंढकर देखो,
कभी धरती पर ये थे भार , अब धरती से भारी हैं।।

कमंडल तज दिया,इनके तो पानी भांड भरते हैं,
कोई सेवक को जड़ता है, तो कुछ शिष्या पर मरते हैं।
जो इनकी हार्डडिस्कें चैक हो जाएं तो खुल जाएं
कि बाबा कैसे -कैसे रोज करम और कांड करते हैं।

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